कोइ तुमसे पुछे
कोण हूँ मैं ?तुम कह देना
कोई खास नही ...
एक दोस्त हैं
पक्का कच्चा सा,
एक झुठ हैं
आधा सच्चा सा !
जज्बात से ढका
एक पर्दा हैं,
एक बहाना
कोई अच्छा सा !
जिवन का ऐसा
साथी था जो,
पास होकर
भी पास नही !
कोई तुमसे पुछे
कोण हूँ मैं ?
तुम कह देना
कोई खास नही ...
एक साथी जो,
अनकही सी
बातें कह जाता हैं !
यादो में जिसका
धुंधला सा,
एक चेहरा ही
रह जाता है !
यूं तो उसके
ना होने का
मुझको कोई
गम नही !
पर कभी कभी
वो आँखो से,
आंसू बनके
बह जाता हैं !
यु रहता तो
मेरे जहन में हैं,
पर नजरो को
उसकी तलाश नहीं !
कोई तुमसे पुछे
कोण हूँ मैं ?
तुम कह देना
कोई खास नही ...
साथ बनकर
जो रहता हैं,
वो दर्द बाटता
जाता हैं !
भूलना तो चाहुँ
उसको पर,
वो यादो मै
छा जाता हैं !
अकेला महसुस
करूँ कभी जो,
सपनो में आ जाता हैं !
मैं साथ खडा हुँ
सदा तुम्हारे,
कहकर साहस
दे जाता हैं !
ऐसे ही रहता हैं
साथ मेरे की,
उसकी मौजूदगी का
आभास नहीं !
कोई तुमसे पुछे
कोण हूँ मैं ?
तुम कह देना
कोई खास नही ...
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